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अहसास ए इश्तियारा

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बहुत से हों गेहों गेलो ग पा स तुम्तुहा रे,
मगर तुमतु खुदखु से पूछपू ना , कि तने हैं सच में सा थ तुम्तुहा रे,
न मैं तेरे पा स हूँ, हूँन मैं तेरे सा थ हूँ, हूँमगर मौ न रहकर भी समझ रहा था सब हा ला त तुम्तुहा रे,
मैंने सि र्फ तेरे हक़ की बा त की थी , मैंने सि र्फ हक़ी क़त की बा त की थी , मैं जा नता हूँ बि खर
चुकेचुके हैं सा रे ख्वा ब तुम्तुहा रे,
जो बा त कही , समझी नहीं गई, उल्टा ता ना मा रा गया , आप तो महा न हो , ज्ञा नी हो , फि र क्यों
जा या करू वक़्त अपना , तूनेतूनेही कहा था मुझमुसे, से नहीं है इतना दि मा ग पा स तुम्तुहा रे,
बस पढ़कर भूलभू जा ना

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