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भगवदगीता द्वारा स्वयं को मुक्त करें आचार्य पुंडरीक गोस्वामी

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युद्ध आरम्भ होने के ठीक पहले भगवान  ने  को जो दिया वह श्रीमद्भगवद्गीता के नाम से प्रसिद्ध है।  के  का अंग है। गीता में 18 अध्याय और 700 श्लोक हैं।आज से (सन 2023) लगभग 5168 वर्ष पूर्व (3145 ई.पू.) पहले गीता का ज्ञान बोला गया था। गीता की गणना में की जाती है, जिसमें और  भी सम्मिलित हैं। अतएव भारतीय परम्परा के अनुसार गीता का स्थान वही है जो उपनिषद् और धर्मसूत्रों का है। उपनिषदों को  (गाय) और गीता को उसका दुग्ध कहा गया है। इसका तात्पर्य यह है कि उपनिषदों की जो अध्यात्म विद्या थी, उसको गीता सर्वांश में स्वीकार करती है। उपनिषदों की अनेक विद्याएँ गीता में हैं। जैसे, संसार के स्वरूप के संबंध में अश्वत्थ विद्या, अनादि अजन्मा ब्रह्म के विषय में अव्ययपुरुष विद्या, परा प्रकृति या जीव के विषय में अक्षरपुरुष विद्या और अपरा प्रकृति या भौतिक जगत के विषय में क्षरपुरुष विद्या। इस प्रकार  के ब्रह्मवाद और उपनिषदों के अध्यात्म, इन दोनों की विशिष्ट सामग्री गीता में संनिविष्ट है। उसे ही पुष्पिका के शब्दों में ब्रह्मविद्या कहा गया

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